Wednesday, November 16, 2016

नोटबंदी और नेता

८ नवम्बर २०१६ से मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले के बाद निश्चित रूप से कालेधन का संचय करने वालों के पेट में दर्द होना तो निश्चित रूप से स्वाभाविक ही है क्योंकि जिन लोगों के पास कालाधन है उनको इस समय असहनीय पीड़ा से गुजरना पड़  रहा है। जो कि यह दर्द लेने वाले भी यह लोग खुद ही हैं। अब इस दर्द की दवा  भी इन्हीं के पास है जिसे इस्तेमाल करके दर्द से बचा जा सकता है। 
 नेता तो देश के सेवक माने जाते हैं जो अनेक प्रकार से देश के नागरिकों की भलाई के लिए कार्य करने में अपने जीवन को बलिदान कर देते हैं ऐसा माना जाता है। सरकार के पक्ष में होते हुए खुद जनता की भलाई के कार्य करने का कार्य करते हैं और विपक्ष में रहते हुए सरकार से जनता से जुड़े कार्य कराने के अपना जीवन गुजार देते हैं। इसलिए शायद इनके पास काला धन तो होना ही नहीं चाहिए। 
लेकिन ऐसा दिखाई देता है कि नोटबंदी से यदि कोई परेशान है तो वह नेता ही है। माननीय राहुल जी नोटबंदी के विरोध को दर्शाने के लिए नॉट बदलवाने के लिए लाइन में लग कर जनता को उकसाने का प्रयत्त्न करते हुए दिखाई दिए। ममता जी को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। माया बहन जी का तो शायद बहुत ही बुरा हाल है मुलायम जी भी इस कारनामे से बहुत ही मुलायम होते नज़र आ रहे है, इन सबसे बुरा हाल तो उन नेता जी का है जो केवल और केवल ईमानदारी की अलख जगाने के कारण नेता बनकर दिल्ली के मुख्य मंत्री बने। जी हाँ मैं माननीय केजरीवाल जी की ही बात कर रहा हूँ। 
निश्चित रूप से आज देश की वह ईमानदार जनता जिसका  कालेधन से कहीं से कहीं तक का कोई रिस्ता नहीं है वह निश्चित रूप से बहुत दुखी और परेशान है उसे नोट  बदलवाने के लिए बहुत बड़ी मसक्कत करनी पद रही है। लेकिन इतना सब कुछ सहने के बाद भी वह मोदी जी के इस फैसले से बहुत ही खुश नज़र आ रही है।  और हंसते हंसते हुए इस पीड़ा को झेलते हुए कह रही है कि निश्चित रूप से कुछ समय बाद इसका देश को बहुत लाभ होगा। 
अब अंत में मैं देश के इन नेताओं से पूछना चाहता हूँ कि इनके पेट में क्यों इतना दर्द हो रहा है। जबकि इस कार्य से देश के अंदर चल रहे नकली नोट अपने आप ही समाप्त हो गए जिसकी मार गरीब व्यक्तियों को ही झेलनी पड़ती थी। अब रह रह कर मेरे मन में अनेक प्रश्न उठते हैं कि जब देश की जनता इससे खुश है तो नेता क्यों परेशान है यह मामला शायद देश की जनता अच्छी तरह से समझ चुकी है अब मेरे कहने का अर्थ भी जनता समझ ही जायेगी। 
                     धन्यवाद। 

Thursday, March 10, 2016

महिला दिवस।

इस वर्ष ही नहीं बल्कि काफी समय से हमारे देश में ही नहीं बल्कि सारी दुनिया में महिला दिवस बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यह बहुत ही अच्छी बात है। लेकिन वास्तविकता इसके बिलकुल विपरीत है।
आज भी सारी दुनिया में महिलाओं पर जिस जिस प्रकार के अत्याचार होते हैं यदि उसके विषय जरा भी जानकारी हो जाए तो निश्चित रूप से मन आत्म ग्लानि से भर उठे। मनुष्य नारी के उदर से जन्म लेकर नारी पर ही अनेकों प्रकार के जुल्म करता है। नारी भी अपने आप को अबला समझ कर पुरुष के सभी अन्याय सहती हुई अपना जीवन जी लेती है। इसी विषय में कवि ने कहा है कि;-
हे अबला तेरी यही कहानी,  आँचल में है दूध और आँखों में पानी॥ 
माना पहले अशिक्षित समाज था, लेकिन आज  विश्व में पढ़े लिखों की बहुत बड़ी संख्या है इसके बावजूद भी महिलाओं पर अत्याचार होते ही रहते है। लेकिन इतिहास गवाह है, स्त्री को अबला समझना पुरुष वर्ग की बहुत बड़ी भूल है जब जब नारी ने सबला बन कर हुंकार भरी है तो अच्छे अच्छों को धूल चटाई है। 
आज स्त्रियां भी पढ़ी लिखी हैं पहले से अधिक अच्छी तरह से अपने परिवार की देखभाल करती हैं। गलतियां सभी से होती हैं। मिल बैठकर हर समस्या का समाधान किया जा सकता है। 
महिला दिवस मनाना भी तभी सार्थक होगा जब पुरुष वर्ग भी महिलाओं को बराबरी का सम्मान दें। अन्यथा इस प्रकार के दिखावे का कोई अर्थ नहीं है। 
इस महिला दिवस के अवसर पर पुरुषों के द्वारा सताई जाने वाली महिलाओं को बस मैं केवल यही कहना चाहूंगा कि  जितना गुनाहगार जुल्म करने वाला होता है उससे अधिक गुनाहगार जुल्म को सहने वाला होता है। इसलिए यदि जुल्म की इंतहा होने लगे तो सबला बन कर जुल्म का सामना करना चाहिए। इस विषय में कवि ने कहा है कि:-
छोड़ो मेहंदी खडग सम्भालो,
खुद ही अपना चीर बचा लो। 
चाल बिछाये बैठे शकुनि, मस्तक सब बिक जाएंगे। 
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो, अब गोविन्द ना आएंगे॥ 
कब तक आस लगाओगी तुम बिके हुए महतारों से। 
कैसी रक्षा मांग रही हो, दू:शासन दरबारों से॥ 
सुनो द्रोपदी शास्त्र उठालो, अब गोविन्द ना  आएंगे। 
कल तक केवल अँधा राजा,  अब गूंगा बहरा है। 
होठ सी दिए हैं जनता के, कानो पर भी पहरा है॥
तुम ही कहो ये अक्षु तुम्हारे , किसको क्या समझायेंगे। 
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो, अब गोविन्द ना आएंगे॥  
 

Thursday, July 16, 2015

भ्रष्ट राजनीति|

आज की ताजा खबर में पढ़ा कि विश्व में सबसे ईमानदार श्रेणी में एक छोटा सा देश कनाडा पहले स्थान पर है, अमेरिका बाइसवे स्थान पर है| जबकि हमारे देश को इस लिस्ट में कोई स्थान नहीं मिला| जबकि आज भी हमारे देश में ईमानदार लोगों की कमी नहीं है|
इस खबर को पढ़ने से मन में एक प्रकार से दुःख भी हुआ और इस खबर ने इस स्थिति पर विचार करने पर भी विवश किया| आज हमारे देश में जगह जगह पर लूटपाट, चोरबाजारी, छिनाझपटी और मिलावट का बाजार गर्म है| अपराधी अपराध करके खुलेआम घुमते हैं और अपराधी के स्थान पर किसी निर्दोष को सजा हो जाती है|
मेरे देश में ऐसा क्यों होता है? काफी विचार करने पर मेरे विचार से इसमें सबसे बडा दोष सरकार का है|  सरकार में बैठे लोगों का है| सरकार में बैठे लोग ही ऐसी स्थिति पैदा करते हैं| जो कायदे क़ानून हमारे देश में हैं उसी प्रकार के क़ानून कनाडा और अमेरिका जैसे देशों में भी हैं| अंतर बस इतना है कि हमारे देश की सरकार में बैठे लोग अपने निजी फायदे के लिए उन कायदे और क़ानून को मजाक बना देते हैं|
हमारे देश के नेताओं के एक से बढ़कर एक घोटाले पाए जाते हैं उसके बाद भी उनका जांच और आयोग बैठाने के चक्कर में कुछ नहीं बिगड़ता| और दोष किसी छोटे के ऊपर मढ कर मामले की इतिश्री कर दी जाती है|
कुछ लोग इस स्थिति को बदलने का प्रयास भी करते है और उनको जनता का भरपूर समर्थन भी मिलता है| लेकिन सरकार बनाने के बाद  उनकी भी स्थिति पहले वालों जैसी ही दिखाई देने लगती है कारण चाहे कुछ भी हों ऐसे व्यक्ति भी अपने आप को बदलने पर मजबूर हो जाते हैं या उनको बदलने पर मजबूर कर दिया जाता है| ऐसी स्थिति में जनता भी अपने आप को ठगा हुआ सा महसूस करने के अलावा कुछ नहीं कर पाती|
अब अन्त में मैं बस इतना ही कहना चाहता हूँ कि जब तक हमारे देश की सरकारें ईमानदार  नहीं होंगी तब तक हमारे देश में इसी प्रकार से लूट खसोट, चोरबाजारी, मिलावाटखोरी मारामारी के साथ साथ दबे कुचले लोगों पर दबंगों के अत्याचार और महिलाओं की बेइज्जती होती ही रहेगी| और हमारा देश सभी देशों से पिछड़ा हुआ, भ्रष्टाचारी देशों की श्रेणी में माना जाएगा| 

Monday, July 6, 2015

घोटाला |

घोटाला ही घोटाला, 
इस देश मे जहाँ देखो घोटाला ही घोटाला, 
पढ़ाई मे घोटाला, नौकरी के लिये घोटाला, 
नौकरी मे तरक्की के लिये भी होता घोटाला, 
यहाँ मंत्री के लिये घोटाला, मरीज के इलाज मे घोटाला, 
जांच की बात मे घोटाला, अरे तूने मुझ पर टाला, 
तो मैने उस पर टाला,उसने सरकार पर टाला, 
यूं ही लगता रहा मिर्च मशाला, व्याप्पम हो या हवाला, 
सरकार को लगी मिर्ची जांच आयोग का तड़का लगा डाला, 
इस तरह मामला ठंडा हुआ तो घोटाला रद्दी की टोकरी मे डाला, 

 

Wednesday, June 24, 2015

स्वच्छता का अभियान, इससे मानव क्यों परेशान|

इसे हमारे देश का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि जिस अभियान को सरकार तन, मन और धन से समर्पित होकर इस देश को स्वच्छ बनाना चाहती है उसी अभियान  को हम कोई सहयोग नहीं देते|

हम जिस प्रकार से  अपने  घर को साफ़ सुथरा रखने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते उसी प्रकार से हमें अपनी गली अपने मोहल्ले, गाँव और शहर को भी साफ़ सुथरा रखने में सहयोग देना चाहिए|

सरकार को भी इस अभियान को चलाने के लिए जनता को उत्साहित करने हेतु कोई इस प्रकार का अभियान चलाना चाहिए जैसा  मध्य प्रदेश के हरदा जिले  के कलक्टर साहब ने चलाया है| आज की ही यह खबर है कि जिला प्रशासन द्वारा खुले में शौच मुक्त गाँवों से प्राप्त होने वाले दूध की कीमत पर प्रति लीटर २५ पैसा अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि प्रदान की जायेगी| इस अभियान के तहत ३० गाँव वाले इस अभियान से जुड़ गए हैं| यह बहुत ही अच्छी बात है|

 अब सरकार को इसके साथ साथ कोई ऐसा कदम भी उठाना चाहिए कि इस प्रकार के अभियान को तोड़ने वालों को जुर्माना भी अदा करना होगा| क्योंकि मानव स्वभाव है कि बिना लालच हम कुछ नहीं करेंगे लेकिन साथ साथ बिना भय के भी कार्य संभव नहीं हो पाते|

मैं अपने देशवासियों को बताना चाहता हूँ कि अमेरिका जैसा बडा देश किस प्रकार से साफ़ और स्वच्छ रहता है| अमेरिका में सभी अपने घरों की सफाई के साथ साथ अपने मकान के चारों ओर खुली जमीन में हवादार वृक्ष लगाते हैं और घास उगाते हैं| वृक्ष भी फलदार नहीं होते हैं फिर भी वृक्ष लगाने होते हैं|

इस घास को  खाद पानी देकर पूरा ध्यान रखते हैं| घास के बडा हो जाने खुद ही मशीनों के द्वारा उसकी कटाई करके ऐसा बना कर रखते हैं कि देखने वाले को बहुत  ही सुन्दर लगता है| जिसके घर के बाहर की घास बहुत सुन्दर होती है उसको सरकार के द्वारा पारितोषिक  दिया जाता है| और यदि किसी के घर की घास की कटाई न की गयी हो तो उस पर जुर्माना भी लगाया जाता है|

अब अन्त में मैं अपने देशवासियों और देश की सरकार से भी निवेदन करना चाहता हूँ कि जब अमेरिका जैसे बड़े देश की सरकार अपने देश कि जनता के सहयोग से अपने देश को सुन्दर और साफ़ सुथरा रख सकते हैं तो हम और हमारी सरकार क्यों नहीं|

Monday, June 15, 2015

योग का विरोध क्यों |

आजकल योग को लेकर बहुत होहल्ला मचा हुआ है| केवल कांग्रेस ही नहीं बल्कि कुछ मुस्लिम नेता भी योग के खिलाफ आग उगलने पर लगे हुए हैं लेकिन क्यों? योग का सम्बन्ध किसी भी विशेष जाती, धर्म या सम्प्रदाय से नहीं है|

योग के करने पर व्यक्तिगत लाभ मिलता है| मुस्लिम समाज नवाज अदा करते हुए भी योग ही करते हैं यदि योग का सम्बन्ध केवल हिन्दुओं से ही है तो निश्चित रूप से मुस्लिम समाज को नवाज छोड़ देनी चाहिए|
कांग्रेस का तो बस एक सूत्री कार्यक्रम है मोदी जी के द्वारा किये गए कार्यों में खोट निकालने का काम| उनका इससे कोई मतलब नहीं कि यह सही है या गलत| अरे भाई जरा ध्यान से सोचो यदि योग में कोई खोट होता तो मोदी जी के आग्रह को स्वीकार करते हुए सारी दुनिया २१ जून को योग दिवस के रूप में मनाने के लिए क्यों राजी होते|

यदि हम जाति, धर्म और सम्प्रदाय से अलग हठकर विचार करें तो हमारे साधू संतों और पीर पैगम्बरों ने अपने अपने तरीके से मानव जाति को स्वस्थ रखने के लिए योग को धर्म से जोड़ा है| ताकि धर्म के डर से ही सही मानव योग करके अपने शरीर को स्वस्थ रख सके|

हिन्दू लोग प्रात: में दैनिक कार्यक्रम से निर्वर्त होकर जमीन पर बैठकर योग की मुद्रा में पूजा करते हैं| एकचित होकर ऊपरवाले का चिंतन करते हैं| समय समय पर योग के अनुसार उपवास करना चाहिए| इस प्रक्रिया को करने के लिए भी धर्म से इस प्रकार जोड़ा गया है कि लोग धर्म के अनुसार ही सही सप्ताह में एक बार उपवास रक्खें| यदि सप्ताह में भी न रख पायें तो दो सप्ताह में एक बार त्रोदसी के रूप में ब्रत रक्खें| यदि ऐसा भी न कर पायें तो महीने में एक बार ही सही पूर्णमासी के ब्रत के रूप में एक बार अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए ब्रत करें|

इसी प्रकार मुस्लिम समाज में भी योग को धर्म से जोड़ा गया है| नवाज अदा करते हुए भी अनेक प्रकार के योग करते हैं| रोजा रखना भी योग से सम्बंधित ही है| मनुष्य यदा कदा कुछ भी खाता रहता है जिसको पचाने के लिए शरीर की पेट रुपी मशीनरी कार्य करती रहती है क्या कभी सोचा है कि जिस प्रकार हम पूरे दिन कार्य करने पर थक जाते है तो विश्राम करते हैं| ठीक उसी प्रकार से पेट रुपी मशीनरी भी थकती होगी| उसको भी विश्राम मिलाना चाहिए| उसे विश्राम दिलाने के लिए ही उपवास और रोजे आदि का विधान रक्खा गया है|

अन्त में मैं सभी से आग्रह करना चाहता हूँ कि अच्छे कार्यों में कभी भी राजनीति से प्रेरित होकर रोड़ा नहीं अटकाना चाहिए| योग से पूरे मानव समाज का ही भला होगा| इसको धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए| इस प्रकार के व्यक्ति जरा ठाडे दिमाक से सोचें कि योग का विरोध क्यों?

Saturday, January 17, 2015

उम्मीद की एक किरण.

दिल्ली में विधान सभा के चुनावों का बिगुल बज चुका है| इस चुनावी माहौल में श्रीमती किरण बेदी जी ने भाजपा का हाथ थाम लिया है| उनके भाजपा में आने से भाजपाइयों  के हौसले बुलंदी पर हैं| किरण जी के भाजपा में आने पर चुनाव में भाजपा को क्या फायदा होगा यह तो चुनावों के परिणाम आने पर ही पता चलेगा|
श्रीमती बेदी जी अपने आप में एक अच्छी शख्सियत की मालिक हैं|उनके व्यक्तित्व पर अभी तक कोई किसी भी किस्म का दाग नहीं है| उन्होंने दिल्ली पुलिस विभाग में नौकरी करते हुए अपने और अपने अधिनस्थ साथियों के मान सम्मान को बरकरार रखते हुए बहुत ही साहसिक कार्य किये हैं| जेल में बंद अपराधियों को भी अपराध की दलदल से निकालने के अनेक प्रयास किये| अपनी जॉब से इस्तीफा देने के बाद भी समाज के उत्थान के कार्यों में व्यस्त रहती है| उन्होंने जनालोकपाल  बिल के लिए भी क्रांतिकारी नेता कि भूमिका में कार्य किया|
दिल्ली में अब विधान सभा के चुनावों के बाद किस पार्टी कि सरकार बनेगी यह तो चुनाव के परिणाम आने पर ही पता चलेगा| यह भी हो सकता है कि भाजपा को बहुमत मिलने पर किरण बेदी जी दिल्ली कि मुख्य मंत्री बन जाएँ| ऐसा होने पर तो दिल्ली की जनता की समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी श्रीमती बेदी जी की ही होगी|
चुनावों के बाद यदि दिल्ली में भाजपा की सरकार भी नहीं बनती है तो भी दिल्ली की जनता ही नहीं बल्कि देश की जनता भी किरण जी को एक उम्मीद की किरण के रूप में देख रही है| किरण जी एक इमानदार छवि से परिपूर्ण है और केंद्र में भाजपा की सरकार है इसलिए उम्मीद की जाती है कि श्रीमती बेदी जी जनता की कसौटी पर खरी उतरेंगी|और बिना किसी भेदभाव की निति के देश की जनता की समस्याओं के समाधान में अपना सहयोग देंगी|

Thursday, January 1, 2015

मुबारक नया साल,

मेरे प्यारे देशवासियों मुबारक नया साल|
देश मेरा तरक्की करे सभी हो  खुशहाल ||
       जियो और जीने दो यह मन्त्र है  बहुत  महान|
      अपनी ना-पाक हर्क्क्तों से बाज आये पाकिस्तान ||
सीजफायर के उलंघन से कुछ नहीं मिल पायेगा|
गरजेगा हिन्दुस्तान तो मिटटी में मिल जाएगा||
       अरे नादान क्यों है परेशान जरा समय को पहचान|
       तू बन जा इंसान वर्ना मिट जायेगी तेरी पहचान|| 

Thursday, December 18, 2014

आंतकवाद का जहर|

आज सारा विश्व आंतकवाद की आग में झुलस रहा है| इस आंतकवाद की जड़ें पूरे विश्व में फ़ैल चुकी हैं| विश्व के सभी देश क्या हिन्दुस्तान क्या पाकिस्तान और क्या अन्य देश सबहीं किसी न किसी प्रकार से आंतकवाद को झेल रहे हैं|
पाकिस्तान में आंतकवादियों ने स्कूल  में घुस कर १३२ मासूम बच्चों सहित १४५ व्यक्तियों का क़त्ल करके जो कोहराम मचाया है उससे सारा विश्व शौक में डूब गया| आंतकवादियों के द्वारा दिए गए इस दर्द से पूरे विश्व की जनता दिल से दुखी है| इससे दुखद और दिल को दहला देने वाली घटना और क्या हो सकती है|
पाकिस्तान को अब अच्छी तरह से अच्छे बुरे का विचार करके कदम उठाने की जरुरत है| पाकिस्तान में बसने वाला आंतकवादी हाफिज सईद आज इस दुखद घटना के लिए मोदी जी को जिम्मेदार ठहरा कर आंतकवाद की आग में घी डालने जैसा काम कर रहा है जबकि सारा संसार जान चुका है कि इस घटना की जिम्मेदारी एक आंतकवादी संघटन ने ली है| फिर भी मोदी जी को इसका जिम्मेदार ठहरा रहा है जो बहुत ही दुखद है|
माननीय नवाज शरीफ जी को इस दुखद घडी में सच्चे मन से विचार करना होगा कि कौन अपना है और कौन पराया| आंतकवादी की कोई कौम नहीं होती है| इन इंसानियत के दुश्मनों को पालने के बजाय समाप्त करने में ही भलाई है| अब समय आ गया है कि आंतकवाद से लड़ने के लिए विश्व के सभी देश एक साथ मिलकर आंतकवाद के खात्मे के लिए सहयोग करें|हिन्दुस्तान की जनता और सरकार हर समय सच्चे मन से पाकिस्तान के साथ है| 

Thursday, November 20, 2014

धर्माचार्य और फरेब के बीच निर्दोष आस्था|

हमारा देश भिन्न भिन्न धर्मों को मानने वाला देश है| इस देश के निवासी धर्म के नाम पर निर्दोष आस्था के वशीभूत अपने तन, मन और धन को न्यौछावर कर देते हैं| अपनी मेहनत की कमाई को धर्म के नाम पर अपनी आँखे मुंद कर दोनों हाथों से लुटा देते हैं| मानव की इस प्रकार की सच्ची और निर्दोष आस्था के कारण रामपाल जैसे धर्म के ठेकेदार नाजायज फायदा उठा कर अपनी सल्तनत खड़ी कर लेते हैं| 
रामपाल ने एक साधारण से व्यक्तित्व से ऊपर उठ कर एक ढोंगी और फरेबी संत होने का नाटक करके भोली भाली जनता को दोनों हाथों से लुटा और जनता धर्म के नाम पर लुटती रही| एक रामपाल ही क्या न जाने हमारे देश में इस प्रकार के पाखंडी और फरेबी कितने ऐसे आदमी हैं जो धर्म के नाम पर लुटते रहते हैं|
धर्म किसे कहते हैं बस यही जानने की आवश्यकता है| सच्चे मन से दूसरों की सहायता करना, अपने आचरण से किसी को कष्ट न पहुंचाना झूठ और फरेब से बचना यही सही मायने में धर्म है| सच्चे मन से अपने परिवार का पालन करना भी धर्म है|
आज के इस धोखे और फरेब की दुनिया में इस प्रकार के ढोंगी और पाखंडी संतों का बहिष्कार करके अपने आप को बचाए रखने की आवश्यकता है| हमें धर्म के नाम पर किसी से डरने की जरुरत नहीं है| धर्म किसी को डराता नहीं है| जबकि इस प्रकार के धर्म के ठेकेदार धर्म का डर दिखा कर भोले भाले व्यक्तियों को अपने चंगुल में फंसा लेते हैं

Thursday, October 9, 2014

पाक नापाक क्यों|

पाकिस्तान एक आजाद मुल्क होते हुए भी आजाद नहीं है| उसका कारण शुरू से ही उसकी औच्ची मानसिकता रहा है| जब से पाकिस्तान अलग हुआ है तभी से वह अपने दुःख से दुखी नहीं बल्कि हिन्दुस्तान के सुख को देखकर  दुखी है| अब तक पाकिस्तान में जितने भी शासक हुए हैं किसी ने भी कश्मीर से आगे कुछ नहीं सोचा| पाकिस्तान हर क्षेत्र में पिछड़ता चला गया|
 
आज पाकिस्तान के अंदरूनी हालात बद से बदतर  होते जा रहे हैं| जगह जगह पर गुटबाजी होने के कारण देश पर कोई ध्यान देने वाला नहीं है| जिसके कारण पाकिस्तान में कई बार मिलेट्री शासन लग चुका| पाकिस्तान के अंदरूनी हालात बहुत ही चिंताजनक हैं| जगह जगह आंतकवादियों ने अपने ट्रेनिंग सेंटर खोले हुए हैं पहले पाकिस्तान ने उनको हिदुस्तान के खिलाप तैयार किया लेकिन अब आंतकवादी वहां की सरकार पर हावी है|
 बहुत ही चिताजनक स्थिति हो गयी थी| पाकिस्तान अपने हिस्से के कश्मीर में बसे लोगों की कोई मदद नहीं कर पा रहा है वहां के लोग अब इस कदर परेशान हैं कि वह अब पाकिस्तान से मुक्त होना चाहते हैं| लोग घर से बेघर हो गए हैं| खाने पीने की भी कोई व्यवस्था ठीक से नहीं है बाढ़ के कारण बीमारियों ने भी अपने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं|
 
उपरोक्त मुद्दों के अलावा भी अनेक ऐसे पाकिस्तान के अंदरूनी मुद्दे हैं जिनसे पाकिस्तान सरकार बहुत दुखी है| पाकिस्तान ने कभी भी अपने देश के विकास और अपने देश के नागरिकों के विषय में ध्यान न देकर केवल कश्मीर का मुद्दा ही उसे नज़र आता है जबकि उसे खुद मालुम है कि कश्मीर किसी भी हालत में उसे मिलने वाला नहीं है परन्तु अपनी नापाक हरक्कतों से अपने देश के नागरिकों का ध्यान बटाने के लिए कश्मीर का राग अलापने लगता है|
 
पाकिस्तान अपनी औच्ची और नापाक हरक्कतों के कारण विश्व में अपनी साख गवां चुका है| इसके बावजूद  अब सीजफायर का उलंघन करके अपने देश की बिगडती हुई अर्थव्यवस्था से ध्यान बताने के लिए दिन प्रतिदिन सीजफायर का उलंघन करके गोलीबारी कर रहा है इसमें भी अब पाकिस्तान की हालत खराब से खराब होती जा रही है|
 
अन्त में मैं पाकिस्तान को एक नेक सलाह देना चाहता हूँ कि जियो और जीने दो वाले सिद्दांत पर चलाकर अपने देश के विकास के विषय में ध्यान देकर अपने देश के नागरिकों के उज्जवल भविष्य बनाने हेतु  प्रयत्नशील रहो| बेकार के लड़ाई झगड़ों में देश को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है| यदि जरा भी इंसानियत बाकी है तो अभी भी समय है|अन्यथा अल्लाह भरोसे|

Friday, September 12, 2014

मौन घोटाला|

हमारा भारत देश सोने की चिड़िया कहा जाता है| वैसे इसमे कोई शक भी नहीं है| इसे कभी गैरों ने लुटा तो कभी अपनों ने| इसके बावजूद हमारा देश अपनी आन बान और शान के साथ अडिग खड़ा हुआ है| पहले आपसी फूट  के  कारण अंग्रेजों ने भारत को लूट कर अपनी तिजोरी भरी| वह भी देश के चन्द लालची कुत्तों के कारण ही संभव हो सका था|
हमारे देश के अनगिनत लोगों ने अपनी जान की कुर्बानी देकर इसे अंग्रेजों के चंगुल से इसलिए आजाद कराया था कि अब देश की भोली भाली जनता सुख चैन की साँसों के साथ अपना जीवन व्यतीत करेगी| लेकिन  ऐसा कुछ भी नहीं हुआ आज हमारे देश की  हालत देख कर उन अमर शहीदों की आत्मा रो पड़ती है जिन्होंने इस देश को आजाद कराने में अपने प्राणों की आहुति दी थी|
सत्ता के लालच में आदमी कहाँ तक गिर सकता है इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है| माननीय मनमोहन सिंह जी ने सत्ता के मोह में अंधे होकर अपने मंत्रियों को दोनों हाथों से लुट खसोट करने की पूरी छुट दी हुई थी| जिन्होंने जनता की मेहनत से कमाए धन को अनेक प्रकार के घोटाले करके अपनी तिजोरी को भरने में कोई कमी नहीं छोड़ी| और मनमोहन जी अपनी मनमोहनी मुस्कान लिए मौन रह कर सब कुछ देखते रहे|
इस प्रकार के धन और सत्ता के लालची लोगों के कारण ही पहले हमारा देश गुलामी की जंजीरों  में जकड़ा गया था| अत: इस प्रकार के जयचंदों से होशियार रहने की आवश्यकता है| अन्त में मेरा अपने देश के कर्णधारों से अनुरोध है कि उनको इस देश की जनता की सुख सुविधाओं के कार्यों में धन का प्रयोग करना चाहिए| और इस प्रकार के लालचियों को कानून के द्वारा सजा दिलानी चाहिए

Monday, August 25, 2014

मोदी जी की वो हुंकार, लगाने लगी है अब बेकार|

मोदी जी ने प्रधान मंत्री बनने के बाद कहा था कि हमें आँख झुका कर नहीं बल्कि आँख मिला कर बात करनी चाहिए| यदि कोई आँख दिखाने की कोशिश करे तो उसको माकूल जवाब देना चाहिए|
पाकिस्तान एक ही माह में अनेकों प्रकार से सीजफायर का उलंघन कर चुका है| और आये दिन करता ही जा रहा है| बोर्डर के आस पास की भोली भाली जनता अपनी जान बचाने के लिए घर से बेघर होकर दर दर भटक रही है|
आज पाकिस्तान कदम कदम पर भारत को आँख दिखा रहा है और हमारी सरकार न जाने क्यों आँख मुंद कर बैठी हुई है| हो सकता है इसमे कोई कूटनीति या राजनीति हो| परन्तु देश की भोली भाली जनता न कूटनीति जानती है और न ही राजनीति| भोली  भाली जनता  तो बस सामने वाले ने जो कहा है उसी पर विश्वास करती है|
लोक सभा के चुनावों से पहले भी मोदी जी कुछ इसी प्रकार की बातें किया करते थे| चुनाव से पहले और बाद में भी अच्छे दिन आने वाली बात कई  बार कही गयी| पाकिस्तान की ना-पाक हर्क्क्तों के कारण अब बोर्डर के आसपास रहने वाली जनता के अच्छे दिनों के बजाय बुरे दिन आ गए हैं| माना कि देश में मानसून की कमी के कारण महंगाई ने पैर पसारे और ईराक युद्द के कारण तेल महंगा हुआ| परन्तु अब जो पाकिस्तान आँखे दिखा रहा है तो उसको माकूल जवाब क्यों नहीं दिया जा रहा है|
अन्त में मैं भारत सरकार से अनुरोध करना चाहता हूँ कि देश की जिस भोली भाली जनता ने भाजपा पर पूर्ण विश्वास करके मोदी जी की बहुमत की सरकार बनाने का कार्य किया है उस भोली भाली जनता का वह विश्वास  बना रहे| और मोदी जी की वह  हुंकार, होने न पाए बेकार||
 

Wednesday, August 6, 2014

संसद एक मंदिर या कुश्ती का अखाड़ा|

ऐसा माना जाता है कि किसी भी देश का संसद एक मंदिर की तरह से होता है| परन्तु आजकल हमारे देश की संसद एक अखाड़े की तरह से हो गयी है| संसद में सभी सांसदों को समाज के उत्थान और देश के विकास के विषय में चर्चा करनी चाहिए| देश के किस प्रदेश की क्या क्या समस्याएं है इस पर चर्चा होनी चाहिए| देश से किस प्रकार से साम्प्रदायिकता को समाप्त करके भाईचारा कायम किया जाए इस पर चर्च होनी चाहिए| देश किस किस प्रकार की जवलंत समस्यायों से जूझ रहा है इस पर चर्चा होनी चाहिए|परन्तु  आजकल संसद में सांसदों का केवल और केवल एक दुसरे के ऊपर छींटाकसी के अलावा कोई काम नहीं है|
 
संसद में नारेबाजी करना,बेकार के संवाद जैसे मोदी जी नेपाल में मंदिर क्यों गए ईद की मुबारकबाद क्यों नहीं दी जबकि ऐसा कुछ नहीं है फिर भी संसद का कीमती समय इस प्रकार की फिजूल की बातों पर बर्बाद किया जाता है|
 
देश के सभी सांसदों को विचार करना चाहिए कि संसद चलने के दिन देश का बहुत अधिक धन व्यय होता है वह धन बेकार की बातों में नष्ट न करके देश के विकास और उत्थान के लिए प्रयोग होना चाहिए|

Friday, August 1, 2014

सच्ची पूजा |

हर धर्म का प्राणी अपने धर्म के अनुसार पुजा अर्चना  करता है| सही मायने में पुजा पाठ करने से मन को शान्ति मिलनी चाहिए| ज्यादातर ऐसा होता है कि पुजा पाठ करते हुए भी मानव का मन इधर उधर डोलता रहता है| मेरे मतानुसार मन पर नियंत्रण करने का ही दूसरा नाम पुजा है|

गृहस्थ जीवन  में जो व्यक्ति  अपने परिवार का सच्चे मन से पालन करता है वह भी भगवान की पुजा कहलाती है| संत रविदास जी का जीवन भी कुछ इसी प्रकार से रहा है| रविदास जी जाति से चमार थे| अपने पारिवारिक व्यवसाय के अनुसार वह भी जूती गांठने का कार्य करते थे| अपने परिवार के पालन कार्य में खर्च करने के बाद जो धन बचता  उसे वह दिन दुखियों की सहायता  और साधू संतों की सेवा में खर्च करते थे|

एक बार उनकी दूकान पर राजपुरोहित जी (पंडित) अपनी जूती ठीक कराने के लिए आये| जूती गांठते  हुए भी रविदास जी धर्म से सम्बंधित बातें करते रहे उनकी बातों से पंडित जी भी काफी प्रभावित हुए जिसके कारण पंडित जी का रविदास जी की दुकान पर आना जाना शुरू हो गया|

 एक दिन पंडित जी ने रविदास जी से कहा कि मैं गंगा स्नान करने जा रहा हूँ तुम भी हमारे साथ चलो| रविदास जी ने कहा कि मेरे पास ग्राहकों का काफी काम करना बाकी है उसे समय पर देना है जिसके कारण मैं आपके साथ गंगा स्नान के लिए नहीं जा सकता| आप मेरी ओर से एक पैसा गंगा जी को दे देना|

पंडित जी गंगा स्नान के लिए चल दिए| गंगा घाट  पर पहुँच कर पंडित जी ने स्नान करके गंगा मैया की पुजा अर्चना के बाद आरती की| अपने सभी कार्यों से फारिग होने के बाद उन्होंने रविदास जी के द्वारा दिया गया पैसा गंगा जी में उछालने के लिए  जैसे ही हाथ ऊपर को उठाया तो तुरंत आवाज आई कि हे मुर्ख ब्राह्मन किसी के द्वारा दी गयी भेंट को फैंक कर नहीं बल्कि सम्मानजनक रूप से उसके हाथों में देना चाहिए|

ऐसा सुनते ही पंडित जी चित्रलिक्खे से  अचंभित हो चारों ओर देखने लगे तो देखा कि गंगा जी के अन्दर से एक हथेली बाहर आई पंडित जी ने वह पैसा उस हथेली के ऊपर रख दिया इसके बाद गंगा जी में से दूसरी हथेली बाहर आई उसमे एक रत्नजडित, अदितीय और बहुत ही सुन्दर कंगन था तुरंत आवाज आई कि हे ब्राह्मन यह कंगन मेरे भक्त रविदास को देदेना| पंडित जी ने वह कंगन ले लिया|

पंडित जी का मन उस अद्दभुत कंगन को देख ईर्ष्या से जल उठा| और लालच के वशीभूत मन के डावांडोल होने पर विचार करने लगे कि इस कंगन पर रविदास का नहीं बल्कि मेरा अधिकार है मैंने बहुत ही भक्तिभाव से गंगा जी की पूजा की उसी से प्रसन्न होकर गंगा  जी प्रगट हुईं यह पैसा तो अचानक बीच में आ गया जिसके कारण उन्होंने यह कंगन रविदास को देने के लिए कहा मैं यह कंगन अपनी पण्डितायन  को दूंगा इसे देखकर वह खुश हो जायेगी|

फिर मन में विचार आया कि यह कीमती कंगन है|  मैं राजा के यहाँ से प्राप्त दक्षिणा से अपने परिवार का पालन करता हूँ| पडोसी इसे देख चर्चा  करेंगे कि ऐसा कीमती कंगन  इस ब्राह्मन के पास कहाँ से आया? चोर उचक्कों का डर अलग से| अगर मैं इस कंगन को राजा साहब को दूंगा तो वह बहुत खुश होंगे|

ऐसा विचार कर पंडित जी ने उस कंगन को राजा को भेंट स्वरूप दे दिया|  राजा ने उस कंगन को अपनी रानी को दिया रानी ने उस कंगन को देख कर राजा से कहा कि महाराज इस कंगन का जोड़ा मिला दीजिये ताकि मैं अपने दोनों हाथों में एक से ही कंगन पहन सकूँ| दोनों हाथों में एक जैसे कंगन पहनने से हाथों की शोभा बढ़ेगी|

राजा ने अगले दिन पंडित जी से उस जैसा दूसरा कंगन लाने के लिए कहा| ऐसा सुनते ही पंडित जी के पैरों के नीचे से ज़मीं खिसक गयी| परेशान हो सोचने लगे कि यह सब उस रविदास के कारण ही हुआ है क्यों न मैं उसे ही इस जाल में फंसा  दूँ| ऐसा सोच कुटिल चाल चलते हुए राजा से कहा कि महाराज यह कंगन तो रविदास ने दिया था अत: संदेशवाहक को भेज कर उससे दूसरा कंगन मंगा  लीजिये|

राजा ने अपने एक कर्मचारी को वह कंगन देकर रविदास जी के पास भेज दिया| पंडित जी भी उस कर्मचारी के पीछे पीछे चल दिए| कर्मचारी के द्वारा दूसरा कंगन मांगने पर रविदास जी ने गंगा जी की स्तुति की| सभी घटित  घटनाओं का बोध होने पर उन्होंने गंगा मैया से प्रार्थना की और कहा कि हे गंगा मैया आज मेरे कारण यह गरीब ब्राह्मन संकट में फंस  गया है अत: इस जैसा ही दूसरा कंगन देने कीकृपा करे|

ऐसा सोचकर उन्होंने अपने सामने रक्खी कठौती में हाथ डाल दिया | (जिस  मिटटी के बर्तन में पानी भर कर चमार चमड़े को भिगो कर नरम करते हैं उस बर्तन को कठौती कहते हैं) जैसे ही उन्होंने हाथ बर्तन से बाहर निकाला उसमे दूसरा पहले जैसा ही कंगन था|

इस द्रश्य को देख पंडित जी आश्चर्यचकित हो रविदास जी के पैरों में गिर कर माफ़ी मांगने लगा| रविदास जी ने पंडित जी को गले से लगा लिया| ऐसे ही व्यक्तियों के बारे में कहा गया है कि:-
                                                                बड़े बड़ाई न तजें बड़े न बोलें बोल|
                                                              हीरा कब मुख से कहे लाख टका मेरा मोल|| 

 उपरोक्त कहानी के आधार पर हमें विचार करना है कि हमारे द्वारा की गयी पूजा कैसी होनी चाहिए| पूजा कोई  दिखावे के लिए नहीं होती| पूजा मन की शांति  के लिए की जाती है| जिस कार्य को करने से मन को शान्ति मिले वही  पूजा है|

Thursday, July 3, 2014

आस्था और विश्वास|

 शंकराचार्य श्री स्वरूपानन्द जी महाराज आज कल श्री सांई राम जी के संदर्भ में अपनी गलत बयानबाजी के कारण विवादों के घेरे में फंसते जा रहे हैं| जबकि इतने महान व्यक्ति को इस प्रकार की बयानबाजी न करके समाज को जोड़ने की कोशिश करनी चाहिए|

हमारे देश में अनेक धर्मों को मानने वाले व्यक्ति निवास करते हैं| सभी हिन्दू, मुस्लिम, सिख और इसाई अपने धर्म के अनुसार अपने अपने पीर पैगम्बरों की पूजा अर्चना करते है| हमारा हिन्दू समाज तो अनेकोंनेक देवी देवताओं की अपनी आस्था और विश्वास के साथ पूजा करते हैं|

हमारे देश में हिन्दू समाज ही नहीं बल्कि दूसरे  धर्म वाले भी व्यक्ति पूजा में विश्वास करते हैं| यदि कोई भी व्यक्ति नि:स्वार्थ  भाव से  समाज को सुधारने के साथ साथ  समाज में फैली कुरीतियों को दूर करते करते अपने प्राणों कीआहुति दे देता है तो लोग स्वत: ही उसके आदर्शों को मानते हुए देवता के सामान उसकी पूजा करने लगते है|

श्री शंकराचार्य जी महाराज कहते हैं कि श्री सांई राम जी के अनुसार सबका मालिक एक है सबका मालिक एक| इस पर शंकराचार्य जी का कहना है कि जिसका मालिक कोई और है आखिर उसकी पूजा क्यों की जाए|

उपरोक्त विषय में हमारे देश के सभी धर्मों के धर्माचार्य कहते हैं कि पूजा पाठ करने के रास्ते अनेक हैं परन्तु सबकी मंजिल एक है| अर्थात वह अद्धभुत, अतुलनीय,स्मरणीय और  चमत्कारिक शक्ति एक ही है जो इस समस्त चराचर को संचालित कर रही है वह शक्ति अजन्मा और निराकार है| फिर भी लोग अनेकोंनेक देवी देवताओं की पूजा अपनी आस्था और विश्वास के साथ करते हैं|

हमारे देशवासी बहुत ही आशावादी और एकदूसरे का अनुशरण करने वाले हैं| इसी संदर्भ में संस्क्रत की एक कहानी "गतानुगति लोके:" का वर्णन करता हूँ जो इस प्रकार है|

हमारे देश में हिन्दू समाज में हर गाँव गाँव और शहरों में आसाढ़ माह में शीतला माता का गाँव या शहर से बाहर बने स्थान पर माँ बहनें अपने बच्चों के साथ  खील पतासे, मिट्ठे पूड़े और  कई प्रकार की दालों को एक साथ मिलाकर जल के लौटे से माता को स्नान कराकर पूजन करती हैं|

एक बार ऐसा हुआ कि एक बहन अपने बच्चे के साथ उपरोक्त सामान लेकर गाँव से बाहर माता का पूजन करने के लिए जा रही थी| रास्ते में उसे बहुत जोर से पेशाब जाने की इच्छा हुई तब उसने एक एकांत स्थान देख कर जल के लौटे के साथ पूजन की समस्त सामग्री अपने बच्चे को पकड़ा कर पेशाब करने के लिए चली गयी| वापस आकर उसने बच्चे से कहा कि लौटे के जल से मेरे हाथ धुलादे| बच्चे ने जैसे ही लोटे से पानी हाथों पर डाला तो उसका दूसरा हाथ डौल गया जिससे पूजा का कुछ सामान जैसे पूड़े, दाल व् खील पतासे वहां पर गिर गए|

उस स्थान से गुजरने वाली अन्य बहनों ने देखा कि यहाँ पर भी किसी ने पूजन किया है हो सकता है सबसे पहले इसी स्थान पर पूजन किया जाता हो अत: मुझे भी यहाँ पूजन करना चाहिए| इसी धटना से उस स्थान को भी पूजा जाने लगा|

इस घटना  का सम्बन्ध केवल आस्था और विश्वास से जुड़ा हुआ है वैसे भी देहात की एक कहावत है की मानते का ही देव है| अर्थात सच्चे मन से किसी भी देवी देवता की आराधना करने से मानव इस भवसागर से पार हो जाता है| 

Monday, May 19, 2014

"भ्रूणहत्या"

आज हमारा देश "भ्रूणहत्या" नामक अभिशाप से पूर्ण रूप से ग्रसित है| इसको एक सामाजिक बिमारी का नाम दिया जाए तो भी अतिश्योक्ति नहीं होगी|

इस बिमारी को बढ़ावा देने में सबसे बडा हाथ दहेज़ प्रथा का है| जब किसी भी परिवार में कन्या का जन्म होता है तो पूरा परिवार ख़ुशी मनाने के स्थान पर दुखी सा नजर आता है| जबकि लड़के के जन्म होने पर ढोल नगाड़ों से उसका स्वागत किया जाता है|

किसी भी परिवार में जन्मी कन्या जब धीरे धीरे जवान होने लगती है तो उस कन्या के मां बाप की धड़कनें तेज होने लगती हैं| जहां भी लड़की का पिता लड़की के लिए वर खोजने के लिए जाता है तो उसे दहेज़ रूपी राक्षक का सामना करना पड़ता है|

ज्यों त्यों करके जब कन्या की शादी हो जाती है तो वर पक्ष की दहेज़ के प्रति संतुस्ठी न होने के कारण उसकी सजा कन्या के साथ साथ उसके पिता जी को भी भुगतनी पड़ती है| वह सोचने पर मजबूर हो जाता है कि जिस अपनी लाड चाव से पाली लड़की की शादी में उसने अपनी वर्षों से संचित सम्पत्ति का स्वाहा किया था आज वही लड़की दुखी है| तो उसकी आत्मा चीत्कार कर उठती है|

इस प्रकार की घटनाओं को देख कर यह "भ्रूणहत्या" नामक बिमारी समाज में फैलने लगती है| ख़ास तौर पर इस बिमारी से हिन्दू समाज सबसे अधिक ग्रसित है| हिन्दू समाज में भी सबसे अधिक वैश्य समाज के उच्च श्रेणी का परिवार अपने यहाँ पुत्री को जन्म नहीं देना चाहता है| और वह सरकार के द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद भी अपने धन के बल पर यह जानने में सफल हो जाता है कि गर्भ में कन्या है जिससे वह भ्रूणहत्या करा देता है|

इस बिमारी के कारण आज भारत में लड़कों के मुकाबले में लड़कियों की संख्या समय समय पर कम होती जा रही है| जिसका खामियाजा भी अधिकतर उच्च श्रेणी के परिवारों को ही भुगतना पड़ता है| जब पुत्र कीआयु ३० के आंकड़े को पार करने लगती है तो वह मध्यम श्रेणी के परिवार की कन्या खोजनी शुरू कर देता है| परन्तु मध्यम श्रेणी का व्यक्ति भी उच्च श्रेणी में श्रेणी के अंतर के कारण अपनी कन्या की शादी नहीं करता है|

आज यह स्थिति है कि उच्च श्रेणी के परिवार अपने लडके की शादी के लिए निम्न श्रेणी के परिवारों की कन्या से बिना दहेज़ के शादी करने के लिए तैयार हो जाते है|

वैसे तो इस बिमारी से हमारा पूरा समाज ही परेशान है| आज की इस असुरक्षा के माहौल में इज्जत के साथ लड़की का पालन पोषण करना  कठिन दिखाई देता है| इस दिशा में भी हमारे देश की सरकार को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है|

अन्त में मैं अपने देशवासियों से निवेदन करना चाहता हूँ कि हमें इस गंभीर विषय पर अपने देश, समाज और अपने वंश के लिए गंभीरता से विचार करने होगा| वर्ना एक दिन ऐसा आएगा कि समाज में असंतुलन की स्थिति पैदा हो जायेगी और हमारे परिवारों के लड़कों की शादी में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा|
                                                                                                                            (प्रमोद कुमार गुप्ता)

"राहुल तो अभी बच्चा है जी"

"राहुल तो अभी बच्चा है जी" राहुल जी वास्तव में राजनीति में अभी बच्चे ही हैं इसमें कोई शक नहीं है परन्तु पार्टी के कुछ चापलूस नेताओं ने राहुल जी के मन में कुछ इस प्रकार के भाव भर दिए थे कि वह खुद को पार्टी का खेवनहार समझ बैठे| उन्होंने दूसरों के पद की गरिमा का अपमान भी करना शुरू कर दिया था|
पार्टी की  हार का ठींकरा अब मनमोहन सिंह जी के मौन के कारण उनके सर पर फोड़ने की तैयारी चल रही है| इस पर विचार किया जाए तो मनमोहन जी को पार्टी के अन्दर बोलने का अधिकार ही कहाँ था| कांग्रेस पार्टी में तो शुरू से ही जो सोनिया जी ने कह दिया वही सही होता था| कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल जी को बनाए जाने के बाद तो राहुल जी अपने आप को पार्टी का मसीहा ही समझ बैठे| 
पार्टी को खुद से अपनी हार के विषय में मंथन करना होगा कि मनमोहन सिंह जी मौन क्यों रहते थे? पार्टी में भ्रष्टाचारी मंत्रियों का बोलबाला किसके कारण था? पार्टी में कौन कौन चापलूस हैं? पार्टी की कौन कौन सी नीतियों के कारण पार्टी विनाश के कगार पर पहुंची है? क्यों देश की जनता ने पार्टी को सिरे से नकार दिया है?
कांग्रेस पार्टी को अपनी नीतियों में बदलाव करके ही चलने पर पार्टी जिन्दा रह सकती है| पार्टी के वरिष्ठ नेतायों को भी अपनी चमचागिरी की निति को छोड़ कर चलना होगा तभी भविष्य में कांग्रेस पार्टी का जनाधार बढ़ सकता है|

Monday, May 5, 2014

नारी व्यथा |

मजबूरियों  का  जाल है  नारी   की  जिन्दगी,
दहेज़ की आग में जलती है औरत की जिन्दगी||

  मां, बाप, भाई, और  पति  की  दर्ष्टि   में,
 एक बब्धन का नाम है नारी की जिन्दगी||

गाँव, शहर  और  नगर  की  हर  गली  गली  में,
कदम कदम पर रौंदी जाती है नारी की जिन्दगी||

दुनिया को  जिसने खुशियाँ  बांटी  उम्रभर,
काँटों से  भरी  सेज  है नारी  की  जिन्दगी ||

चुनरी  की  जगह  इसको  कफ़न तो न दीजिये,
कहे पा का कि खुशियों से भर दो नारी की जिन्दगी||
 

Friday, April 18, 2014

विकास की चाह में |

जन  जन  करता   यही  पुकार |
कांग्रेस की सरकार बिल्कुल बेकार||
इसे  भगाने  को  हम  हैं  तैयार |
अबकी   बार   मोदी    सरकार ||
 
कांग्रेस की सरकार करती है  अत्याचार|
चारों  ओर  फैला  दिया है  व्यभिचार||
हमें मिलजुल कर करना होगा  विचार|
अबकी   बार   मोदी   की   सरकार ||
 
देश  से  मिट  जाएगा   भ्रष्टाचार |
नहीं  होंगे  नारी  पर   अत्याचार ||
अब  कुशाशन  का होगा  बंटाधार |
अबकी बार मोदी जी  की  सरकार||
 
देश में बहेगी शुशाशन और भाईचारे की बयार |
ऐसी हो मोदी सरकार, कि तारीफ़ करे  संसार ||
पा का की यही है ललकार आपस में करें हम प्यार|
अबकी बार मोदी जी की भाजपा  वाली  सरकार ||